पितृ पक्ष के पावन समय पर्व पर हमें ये
जानना बहुत जरूरी है कि कलयुग में कोई साक्षात भगवान है तो हमारे पितृ है, पितरों के कर्म, पितरों की शांति ही आने वाली पीढ़ी को दशा और दिशा तय करती है, इसलिए पितरों का सदैव सम्मान करे और सिर्फ पितृ पक्ष में ही उनको याद ना करे ब्लकि हर माह के अमावस के दिन पितरों के नाम से गरीब भोज जरूर कराए, और ये भी खयाल रखे कि आज आपके घर में जो भी बुजुर्ग है वो कल आपके पितर होंगे अतः उनका सदैव सम्मान करे, उनका खास ख्याल रखे, उनके मृत्य पाश्चात् अंतिम संस्कार की क्रिया व पिंड दान को ठीक ठीक संपादित करे, साथ ही साथ घर के बुजुर्ग भी ध्यान रखे कि आपके किए हुए कर्म का फल आपके बच्चों को जरूर मिलता बुजुर्गों के किये हुए गलत कार्य ही आने वाली पीढ़ी के कुंडली में पितृ दोष के कारण बनते हैं, अतः अपने आने वाले पीढ़ी को खुश देखने हेतु, सन्तान और धन धान्य से सम्पन्न देखने हेतु अच्छे कर्म करे, यह चक्र चलायमान है!!
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