
2 अप्रेल 2026 के बाद युद्धविराम की स्थित



18 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है यह पक्ष पितृ तर्पण और श्राद्ध का माना जाता है यह पंद्रह दिन का पखवाड़ा बहुत ही शुभ होता है क्युकी शास्त्रों के अनुसार पितृ स्वर्ग लोक से उतर कर इस समय धरती लोक पर आते हैं और ज्योतिषीय दृष्टि से भी देखे तो पितृ ही कलयुग के भगवान माने जाते हैं, ऐसे मे ईन पंद्रह दिनों में कुछ विशेष नियम है जिनका पालन करना बहुत जरूरी है अन्यथा पितृ रुष्ट होते हैं, पितृ पखवाड़ा मे ब्रम्हचर्य का पालन करे, मांस मदिरा से कोषों दूर रहे, तामसिक भोजन ना करे, स्वस्थ्य से संबधित चीजों का काम करे अपने आपको बीमार ना करे खासकर जब आप घर के बड़े हो, क्रोध ना करे इस दिनों मे शांत रहे, पशुओं से प्रेम करे किसी प्रकार का नुकसान ना पहुंचाये, किसी से द्वेष बैर ना निकाले, लड़ाई झगड़ा ना करे, कोई ऐसा काम ना करे जो सैद्धांतिक रूप से गलत हो, दान जरूर करे खासकर श्राद्ध के दिन और अमावस्या के दिन!!
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18 सितंबर को पितृ पक्ष शुरू हो रहा है, लेकिन पितृ पक्ष इस बार दो ग्रहण के बीच मे हो रहा है पहले दिन ही चंद्र ग्रहण पड़ रहा है तो आखिरी श्राद्ध के दिन 2 अक्तुबर को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है, अतः कुल मिलाकर पंद्रह दिन के भीतर दो ग्रहण वो भी पितृ तर्पण काल मे ये अच्छे संकेत नहीं है, ये ग्रहण काल देश मे बड़े कोलाहल और राजनीतिक हलचल के संकेत दे रहा है, साथ ही साथ कोई संक्रामक बीमारी का फैलना अचानक से मौसम परिवर्तन और कुछ जगह पर भारी बारिश और मौसम परिवर्तन के संकेत दे रहा है!
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