कोरोना के दूसरे लहर की ज्योतिषीय विवेचना

राहु और केतु हमारे शरीर के श्वास से संबंधित बीमारियों का कारण बनते हैं, राहु – केतु ही काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं और सारे ग्रह को अपने ’प्रभाव मे ले लेते हैं और नियन्त्रित करते हैं, भारत की कर्क राशि वाली कुंडली में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बन रही है, राहु – केतु का पूर्ण वर्चस्व हैं और काल सर्प दोष का निर्माण, काल सर्प दोष की इस व्यवस्था को विषधर काल सर्प दोष कहा जाता, जिसका प्रभाव एकादश भाव और पंचम भाव में स्थिति के हिसाब से रहता है और जैसा कि आप देख रहे हैं कि पूरे देश को राहु – केतु अपने हिसाब से नचा रहा है, पूरा भारत देश #Corona महामारी से गुजर रहा है और लगभग सभी राज्यों मे #Lockdown की स्थिति निर्मित हो गई है, राहु वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में स्थित है जहा वृषभ राशि में स्थित होकर यह गले से संबंधित, ग्रास नली से संबंधित और गल कंठ से संबंधित रोग उत्पन्न करता है वही इसकी द्रष्टि तृतीय भाव पर भी पड़ रही है जो भाव शरीर के फेफड़े, श्वास नली और वायु द्वार का नेतृत्व करती राहु का काम रोड़ा अटकाना है और राहु श्वास नाली और वायु द्वार के रास्ते पर रोड़ा अटका रही है और यही #Covid_19 के लक्षण है, वही केतु ज्येष्ठ नक्षत्र और वृश्चिक राशि में स्थित है जो कि मंगल का घर है ( शरीर में रक्त संचार का स्वामी है) दोनों मिलकर रक्त से संबंधित बीमारी उत्पन करते हैं और रक्त में बीमारी को तेजी से फैलाते है जैसा कि आप जानते रक्त का थक्का ज़म जाना और अचानक मौत हो जाना भी #COVID का एक  लक्षण है, इसलिए भारत में #COVID रुकने का नाम नहीं ले रही है, राहु – केतु की फैलाई ज्यादातर बीमारिया संक्रामक होती है चाहे दाद – खाज हो या फिर #corona, बीच में कुछ माह के लिए भारत की कुंडली में काल सर्प दोष से मुक्ति मिली थी जिसके कारण #COVID का प्रकोप कम भी हुआ था, इसका प्रभाव 27 मई के बाद कुछ कम होते हुए दिखाई देगा पर खत्म नहीं होगा साथ ही म्रत्यु दर भी कम होगा , 2022 के बाद काफी हद तक खत्म होते दिखाई देगा!!

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